अवचेतन मन की शक्ति
कुछ दिनों पहले प्रख्यात मनोवैज्ञानिक "डॉ० जोज़फ़ मर्फी" की बेस्टसेलर किताब "द पावर ऑफ़ योर सबकॉन्शस माइंड" पढ़ने का इत्तिफ़ाक़ हुआ ... किताब में लिखा था कि सही तरीके से प्रार्थना कर के कोई भी व्यक्ति मनचाहा फल पा सकता है, क्योंकि जिस शक्ति को "ईश्वर" कहा जाता है, ये मूलरूप से कल्याणकारी शक्ति है ..... ये शक्ति हर व्यक्ति का कल्याण करने के लिये ही तत्पर रहती है, और कल्याण करती भी है और व्यक्ति का बुरा दरअसल व्यक्ति के खुद के सोचने के गलत ढंग के कारण होता है... जब व्यक्ति को हर समय कुछ अनहोनी होने की आशंका रहे तो उसके साथ वो अनहोनी ज़रूर हो जाती है, दरअसल ऐसे व्यक्तियों के चेतन मन अनहोनियों को आमंत्रित करते हैं, अगर ये लोग अनहोनी की किसी आशंका को दिमाग में आते ही झटक दें और ये मज़बूत विश्वास रखें कि ईश्वर उनका अहित नही होने देगा बल्कि कल्याण ही करेगा तो उनके साथ कोई अनहोनी नही होगी... व्यक्ति का बुरा तब भी होता है, जब व्यक्ति को खुद कोई अपराधबोध होता है, ये अपराधबोध अगर उसने कुछ भी गलत किया है तो उसके अवचेतन मन में निश्चित रूप से बसा ही रहता है, और अपना बुरा होने से बचाने के लिये व्यक्ति को ईश्वर से क्षमा मांगना और पश्चाताप करना बहुत ज़रूरी होता है
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.... डॉ मर्फी ने मानवीय मनोविज्ञान के गहरे अध्ययन के बाद जो तथ्य निकाले थे वो वाक़ई हम सबके लिये फायदेमंद साबित होंगे अगर हम उनके बताए तरीकों पर अमल करें तो.... डॉ मर्फी कहते हैं कि व्यक्ति जैसा अपने मन में अपने या दूसरों के लिये विचार रखता है उसके साथ बाहरी दुनिया में बिलकुल वैसा ही घटित होता है, जो व्यक्ति दूसरों के लिये अपने मन में दुर्भावनाएं रखता है, तो इसके मन की नकारात्मकता के प्रभाव से खुद इसका ही अहित हो जाता है, अपने साथ होने वाले अहित से बचने के लिये व्यक्ति को तमाम अन्य व्यक्तियों के प्रति दुर्भावनाओं का त्याग कर देना चाहिये और सबके लिये अच्छे विचार ही रखने चाहिए
..... इन सब सावधानियों के बाद व्यक्ति जो भी अपने लिये मांगेगा और प्रार्थना स्वीकार होने में बिलकुल भी संदेह नही रखेगा, उसकी प्रार्थना ज़रूर स्वीकार होगी, इस विषय में डॉ मर्फी ने अनेक आश्चर्यजनक उदाहरण दिए के कैसे भिन्न भिन्न लोगों ने कुछ चीज़ों के लिये सकारात्मक रूप से इच्छा की और चमत्कारी रूप से उन्हें वो चीज़ें मिल गईं ... जैसे एक लड़की का उदाहरण उन्होंने दिया जो कि एक वास्तविक घटना थी, इस लड़की को एक बड़ा महंगा पर्स पसन्द आया, उसके पास उस पर्स को खरीदने के पैसे नही थे, लेकिन किसी भी नकारात्मक भाव को अपने मन में उस लड़की ने नही आने दिया उसने बड़े विशवास से सोचा "ये पर्स मेरा है, जल्द ही मेरे हाथों में होगा" उसने इस बात को बार बार खुद से कहा और चमत्कारी ढंग से अगले ही दिन शाम को उस लड़की के मंगेतर ने सरप्राइज़ के तौर पर एक पैकेट दिया जिसमें से वही पर्स निकला जिसकी उस लड़की ने केवल अपने मन में तीव्र इच्छा की थी
इसी तरह एक युवती का वास्तविक उदाहरण था जिसने कैडिलक कार को पाने की तीव्र इच्छा की थी जबकि उस कार को खरीदने के लिये उसके पास पर्याप्त पैसे नही थे, लेकिन फिर भी उसने उस कार को पाने में कोई संदेह मन में नही आने दिया वो हर समय अपने मन में कहती कि ये कैडिलक कार मेरी है, वो कल्पनाओं में कार के बोनट का स्पर्श करती, ड्राइविंग सीट पर बैठती और स्टीयरिंग व्हील घुमाती .... हफ्ते भर इसी तरह की कल्पनाएं करने के बाद उसे अप्रत्याशित रूप से एक दूर के अंकल की विरासत में हिस्सा मिलने की खबर मिली जिन्होंने कुछ पैसों के साथ ही अपनी एक कैडिलक कार इस लड़की के नाम कर दी थी...
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.......... .. इस तरह के वास्तविक लोगों के अनेक उदाहरण थे किताब में जिनपर आश्चर्य ही किया जा सकता था... पर क्योंकि मैंने यानि ज़िया इम्तियाज़ ने ईश्वर पर पूरे यकीन के साथ दुआ मांगने, दुआ की कुबूलियत पर संदेह न करने, खुद को पापमुक्त मानकर ईश्वर के ज़्यादा सानिध्य में होने का विश्वास लेकर दुआ मांगने के सकारात्मक और आश्चर्यजनक परिणाम देखे हैं, इसलिये इन बातों पर सुख मिश्रित आश्चर्य हुआ मुझे, ये बातें सबके काम आ सकती हैं ये सोचकर मैंने ये पोस्ट लिखी है, ये पोस्ट लिखने को मुझे इस बात ने भी प्रेरित किया क्योंकि हदीसों में दुआ की कुबूलियत के लिये भी मैंने यही नियम पढ़े कि दुआ को अल्लाह पर पूरे यकीन के साथ माँगा जाए, और दुआ की कुबूलियत को यकीनी माना जाए तो दुआ जल्द क़ुबूल होती है, .. डॉ मर्फी की किताब में ऐसे बहुत से नुस्खे थे जो इंसान की ज़िंदगी बदल सकते हैं, लेकिन एक पोस्ट में किताब के सारे फायदेमंद नुस्खे समेटना मुश्किल है, इसलिये आगे भी अलग अलग पोस्ट्स में ये बातें जारी रहेंगी
बहरहाल आप अगर अपने मन में ईश्वर के प्रति ईमानदार बनकर और दुनिया के तमाम लोगों के प्रति दुर्भावनाएं दिल से भुलाकर व नेक व्यक्ति बनकर ईश्वर से पूर्ण विश्वास के साथ प्राथनाएं करके उसके कल्याणकारी परिणाम देखिये....
हां प्रार्थना जल्द स्वीकार हो इसका एक नुस्खा तमाम मनोवैज्ञानिक इलाजों में बताया जाता है और यही डॉ मर्फी ने भी बताया है कि रात को सोने से पहले रोज़ अपनी प्रार्थना को दोहराया करें, क्योंकि जब आप सोते हैं तब आपका अवचेतन मन जागता है और अवचेतन मन ईश्वरीय कल्याणकारी, चमत्कारी शक्ति के ज़्यादा करीब होता है इसलिये आपकी प्रार्थनाओं के जवाब बहुत जल्दी मिल जाते हैं !!! विश्वास के साथ करिये, और सुखद परिणाम देखिये
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